पुरुषोत्तम मास में ३३ मालपुवे का दान सबसे बड़ा दान माना गया है।
इसकी विधि और महिमा स्वयं भगवान शिवजी माता पार्वतीजी से बता रहे हैं।
शास्त्रों के अनुसार देवताओं को 33 वर्गों में बांटा गया है।33 कोटि देवता का अर्थ 33 करोड़ देवता नहीं बल्कि 33 प्रकार के देवता हैं। यहां "कोटि"का अर्थ "करोड़" नहीं होकर "प्रकार" होता है।पुरुषोत्तम मास में 33 मालपुआ चढ़ाने का यह विधान 33 कोटि देवताओं के निमित्त है।गेहूं का आटा गुड़ घी द्वारा बनाया हुआ मालपुआ चढ़ाया जाता है।
33 मालपुआ बना लें और इन्हें एक साथ कच्चे सूत से सात बार लपेट लें। फिर कांसे (कांस्य) के पात्र में रख कर भगवान के सम्मुख रखें।हाथ जोड़कर श्रद्धा पूर्वक नीचे दिए गए मंत्रों का उच्चारण करें तथा श्लोक मंत्र का पाठ कर भगवान को प्रणाम करें उसके पश्चात पुआ किसी योग्य सदाचारी ब्राह्मण को दान दें अथवा किसी भूखे व्यक्ति को मंदिर में जाकर दान दें ।शास्त्रों के अनुसार इन ३३ देवताओं को चार मुख्य भागों में बाँटा गया है: ८ वसु, ११ रुद्र, १२ आदित्य और २ अन्य देवता।🪷 अष्ट वसु (८ देवता)१. धर – ॐ धराय नमः२. आप – ॐ अद्भ्यो नमः (या ॐ आपाय नमः)३. अनल – ॐ अनलाय नमः४. अनिल – ॐ अनिलाय नमः५. ध्रुव – ॐ ध्रुवाय नमः६. सोम – ॐ सोमाय नमः7. प्रत्यूष – ॐ प्रत्यूषाय नमः८. प्रभास – ॐ प्रभासाय नमः🌺 एकादश रुद्र (११ देवता)१. कपाली – ॐ कपालिने नमः२. पिंगल – ॐ पिंगलाय नमः३. भीम – ॐ भीमाय नमः४. विरूपाक्ष – ॐ विरूपाक्षाय नमः५. विलोहित – ॐ विलोहिताय नमः६. शास्ता – ॐ शास्त्रे नमः७. अजपाद – ॐ अजपादाय नमः८. अहिर्बुध्न्य – ॐ अहिर्बुध्न्याय नमः९. शम्भु – ॐ शम्भवे नमः१०. चण्ड – ॐ चण्डाय नमः११. भव – ॐ भवाय नमः🌺 द्वादश आदित्य (१२ देवता)1.धाता – ॐ धात्रे नमः२. मित्र – ॐ मित्राय नमः३. अर्यमा – ॐ अर्यम्णे नमः४. शक्र – ॐ शक्राय नमः५. वरुण – ॐ वरुणाय नमः६. अंश – ॐ अंशाय नमः७. भग – ॐ भगाय नमः८. विवस्वान – ॐ विवस्वते नमः९. पूषा – ॐ पूष्णे नमः१०. सविता – ॐ सवित्रे नमः11. त्वष्टा – ॐ त्वष्ट्रे नमः१२. विष्णु – ॐ विष्णवे नमः🌸अन्य देवता (२ देवता)(शतपथ ब्राह्मण और बृहदारण्यक उपनिषद के अनुसार)१. इन्द्र – ॐ इन्द्राय नमः२. प्रजापति – ॐ प्रजापतये नमः(यदि अश्विनी कुमारों को इस स्थान पर गिना जाए, तो उनके मंत्र इस प्रकार होंगे:)• नासत्य – ॐ नासत्याय नमः• दस्र – ॐ दस्राय नमः🌸🌺🪷विष्णुरूपी सहस्त्रांशु सर्वपापप्रणाशनः ।। अपूपान्नप्रदानेन मम पापं व्यपोहतु।सब पापों को नष्ट करनेवाले विष्णुरूपी सूर्य अपूपान्त्र के देनेमात्र से मेरे पापों को दूर करें।नारायण जगद्बीज भास्करप्रतिरूपक ।। व्रतेनानेन पुत्रांश्च संपदं चाभिवर्द्धय।नारायण भास्करप्रतिरूपक जगद्द्वीज इस व्रत से मेरे पुत्रों की तथा संपत्ति की अभिवृद्धि करो।यस्य हस्ते गदाचक्रे गरुडो यस्य वाहनम् ।।शङ्खः करतले यस्य स मे विष्णुः प्रसीदतु।जिसके हाथ में गदा, चक्र है, गरुड़ जिसका वाहन है, शंख जिसके हाथ में है वह विष्णु मेरे ऊपर प्रसन्न हों।कलाकाष्ठादिरूपेण निमेषघटिकादिना ।। यो वञ्चयति भूतानि, तस्मै कालात्मने नमः।
कला और काष्ठादिरूप से निमेष घटी आदिरूप से जो सब प्राणियों की वञ्चना करता है, उस कालरूप को नमस्कार है।कुरुक्षेत्रमयं देशः कालः पर्व द्विजो हरिः ।। पृथ्वीसममिदं दानं गृहाण पुरुषोत्तम।यह देश कुरुक्षेत्र के तुल्य है। काल पर्व के तुल्य है। यह द्विज हरि के तुल्य है। हे पुरुषोत्तम! पृथ्वी के तुल्य इस दान को ग्रहण करो।मलानां च विशुद्ध्यर्थं पापप्रशमनाय च ।। पुत्रपौत्राभिवृद्ध्यर्थं तव दास्यामि भास्कर।हे भास्कर, मलों की शुद्धि तथा पापों के प्रशमन के लिए पुत्र-पौत्र आदि वृद्धि के लिये आपको देता हूँ।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻


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