नारायण आध्यात्मिक ऊर्जा NARAYAN ETHEREAL ENERGY
Wednesday, 29 July 2026
सद्गुरु की चेतना
Saturday, 13 June 2026
नाच न जाने आंगन टेढ़ा
🌿 नाच न जाने, आँगन टेढ़ा
बहुत समय पहले एक गाँव में कमला नाम की एक महिला रहती थी। उसे अपने ऊपर बड़ा गर्व था। वह हर काम में स्वयं को सबसे श्रेष्ठ समझती थी, लेकिन एक समस्या थी—वह अपनी गलतियाँ कभी स्वीकार नहीं करती थी।
एक दिन गाँव में एक बड़ा उत्सव आयोजित हुआ। वहाँ गायन, वादन और नृत्य की प्रतियोगिताएँ रखी गईं। कमला ने घोषणा कर दी—
"देखना, आज मैं ऐसा नृत्य करूँगी कि पूरा गाँव मेरी प्रशंसा करेगा।"
संध्या हुई। चौपाल पर दीपक जल उठे। गाँव के लोग उत्साह से भरकर एकत्र हो गए।
ढोलक बजी, मंजीरे बजे और कमला मंच पर आ गई।
लेकिन जैसे ही नृत्य शुरू हुआ, उसके कदम बार-बार लड़खड़ाने लगे। ताल छूट गई। हाथों की मुद्राएँ भी लय से बाहर थीं। दर्शक समझ गए कि कमला ने अभ्यास तो किया ही नहीं था।
नृत्य समाप्त हुआ तो चारों ओर सन्नाटा छा गया।
कमला को अपनी कमी स्वीकार करनी चाहिए थी, पर उसने तुरंत कहा—
"इस आँगन में ही दोष है! ज़मीन टेढ़ी-मेढ़ी है। कोई भी यहाँ ठीक से नाच नहीं सकता।"
भीड़ में बैठे एक बुज़ुर्ग ज्ञानी मुस्कुरा दिए।
उन्होंने धीरे से पूछा,
"बेटी, क्या सचमुच आँगन टेढ़ा है?"
कमला बोली,
"हाँ, बिल्कुल! यदि आँगन सीधा होता तो मेरा नृत्य देखकर सब दंग रह जाते।"
बुज़ुर्ग ने पास खड़े एक छोटे बालक को बुलाया और कहा,
"बेटा, ज़रा नाचकर दिखाओ।"
बालक ने ढोलक की ताल पर कुछ सरल कदम रखे। वह सुंदरता से नाच गया।
फिर एक दूसरी युवती आई। उसने भी उसी आँगन में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दिया।
अब सभी की नज़रें कमला पर थीं।
बुज़ुर्ग ने मुस्कुराकर कहा,
"आँगन तो वही है बेटी, जो तुम्हारे लिए टेढ़ा था। यदि आँगन दोषी होता, तो ये दोनों कैसे नाच लेते?"
कमला का सिर झुक गया।
बुज़ुर्ग आगे बोले,
"मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी यह नहीं कि उसमें दोष हैं। सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह अपने दोषों को स्वीकार नहीं करता।"
"जब तक हम अपनी असफलताओं का कारण दूसरों में खोजते रहेंगे, तब तक सुधार का द्वार बंद रहेगा।"
उस दिन कमला की आँखें खुल गईं।
उसने बहाने बनाना छोड़ दिया और प्रतिदिन अभ्यास करने लगी। कई महीनों की मेहनत के बाद वही कमला गाँव की सबसे अच्छी नृत्यांगना बन गई।
जब लोग उसकी प्रशंसा करते, तो वह मुस्कुराकर केवल एक बात कहती—
"जिस दिन मैंने आँगन को दोष देना छोड़ा, उसी दिन मेरा जीवन बदलना शुरू हो गया।"
🌸 शिक्षा
" #नाच #न #जाने , #आँगन #टेढ़ा " केवल एक #कहावत नहीं, बल्कि #जीवन का #दर्पण है।
जब हम अपनी भूलों, कमियों और आलस्य को स्वीकार नहीं करते, तब हम दोष परिस्थितियों, भाग्य, समय और दूसरों पर डाल देते हैं।
लेकिन सफलता उसी को मिलती है जो बहाने नहीं, आत्मनिरीक्षण करता है।
✨ दुनिया को बदलने से पहले स्वयं को बदलना सीखिए।
क्योंकि अधिकांश बार आँगन टेढ़ा नहीं होता, हमारी तैयारी अधूरी होती है। ✨
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