Thursday, 3 October 2024

#श्रीगायत्रीशापविमोचनम् / #गायत्री शापोद्धार स्तोत्र

#श्रीगायत्रीशापविमोचनम् / गायत्री शापोद्धार स्तोत्र 
शापमुक्ता हि गायत्री चतुर्वर्गफलप्रदा ।
अशापमुक्ता गायत्री चतुर्वर्गफलान्तका॥

ॐ अस्य श्रीब्रह्मशाप विमोचन मन्त्रस्य निग्रहानुग्रह कर्ता प्रजापतिरृषिः अथवा ब्रह्मा ऋषिः । कामदुघा गायत्री छन्दः।भुक्तिमुक्तिप्रदा ब्रह्मशापविमोचनी गायत्रीशक्ति र्देवता।ब्रह्मशापविमोचनार्थे जपे विनियोगः ॥

ॐ गायत्रीं ब्रह्मेत्युपासीत यद्रूपं ब्रह्मविदो विदुः ।
तां पश्यन्ति धीराः सुमनसो वाचमग्रतः ।
ॐ वेदान्तनाथाय विद्महे हिरण्यगर्भाय धीमही तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात् ।
ॐ देवि गायत्री त्वं ब्रह्म शापात् विमुक्ता भव ॥

     ॐ अस्य श्रीवसिष्ठशाप विमोचन मन्त्रस्य निग्रहानुग्रहकर्ता वसिष्ठऋषिः विश्वोद्भवा गायत्री छन्दःवसिष्ठानुग्रहिता गायत्रीशक्ति देवताः।वसिष्ठ शाप विमोचनार्थं जपे विनियोगः ॥

तत्त्वानि चाङ्गेष्वग्निचितो धियांसः ध्यायति विष्णोरायुधानि बिभ्रत् ।
जनानता सा परमा च शश्वत् । गायत्रीमासाच्छुरनुत्तम च धाम
ॐ गायत्रीवसिष्ठशापाद्विमुक्ता भव ।

ॐ सोऽहमर्कमयं ज्योतिरात्मज्योतिरहं शिवः । 
आत्मज्योतिरहं शुक्रः सर्वज्योतिरसोऽस्म्यहम् ॥ 
(इति युक्त्व योनि मुद्रां प्रदर्श्य गायत्री त्रयं पदित्व )
( योनि मुद्रा दिखाकर ३-तीन बार गायत्री मन्त्र का जाप करे ।) 
ॐ देवी गायत्री त्वं वसिष्ठ शापात् विमुक्ता भव ॥

ॐ अस्य श्रीविश्वामित्र शापविमोचन मन्त्रस्य नूतनसृष्टिकर्ता विश्वामित्रऋषिः वाग्दोहा गायत्री छन्दः। विश्वामित्रानुगृहिता गायत्री शक्तिः सविता देवता। विश्वामित्रशाप विमोचनार्थे जपे विनियोगः ॥

तत्त्वानि चाङ्गेष्वग्निचितो धियांसस्त्रिगर्भां यदुद्भवां
देवाश्चोचिरे विश्वसृष्टिम् । तां कल्याणीमिष्टकरीं
प्रपद्ये यन्मुखान्निःसृतो वेदगर्भः ॥

ॐ गायत्रि त्वं विश्वामित्रशापाद्विमुक्ता भव ॥

ॐ गायत्रीं भजाम्यग्निमुखीं विश्वगर्भां यदुद्भवाः । 
देवाश्चक्रिरे विश्वसृष्टिं तां कल्याणीमिष्टकरीं प्रपद्ये ॥ 
ॐ देवी गायत्री त्वं विश्वामित्र शापात् विमुक्ता भव ॥

ॐ अस्य श्रीशुक्रशापविमोचनमन्त्रस्य श्रीशुक्र ऋषिः ।अनुष्टुप्छन्दः । देवि गायत्री देवताः।शुक्र शाप विमोचनार्थं जपे विनियोगः ॥

सोऽहमर्कमयं ज्योतिरर्कज्योतिरहं शिवः। 
आत्मज्योतिरहं शुक्रः सर्वज्योतिर सोऽस्म्यहम् ॥

ॐ देवी गायत्री त्वं शुक्र शापात् विमुक्ता भव ॥

                    ~प्रार्थना ।
ॐ अहो देवि महादेवि सन्ध्ये विद्ये सरस्वती । 
अजरे अमरे चैव ब्रह्मयोनिर्निमोऽस्तुते ॥ 

ॐ देवी गायत्री त्वं ब्रह्मशापात् विमुक्ता भव । वसिष्ठशापात् विमुक्ता भव । 
विश्वामित्रशापात् विमुक्ता भव । 
शुक्रशापात् विमुक्ता भव ॥
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नवरात्रि लघु उपाय Navratri special smart method व्यापार में हो रहा है लगातार नुकसान (घाटा) तो यह उपाय आपके लिए ही है-

 व्यापार में हो रहा है लगातार नुकसान (घाटा) तो यह उपाय आपके लिए ही है- 

आप कितना भी परिश्रम कर रहे हैं, किन्तु आपके व्यापार में, दुकान में, व्यवसाय में लगातार नुकसान घाटा उठाना पड़ रहा है, तो उसके लिए ही है यह छोटा-सा उपाय -

किसी भोजपत्र पर हल्दी की स्याही से अनार की कलम द्वारा निम्न मंत्र लिखें -

॥ ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं श्री मेव कुरु कुरु वांछित मेव ह्रीं ह्रीं नमः॥

 इसे आप भोजपत्र या पीपल के अखंडित पत्ते पर लिख लें।
मंत्र लिखने के बाद अपने पूजा कक्ष में या अपने घर के किसी साफ स्थान पर पीले कपड़े के आसन पर स्थापित करें। धूप-दीप दिखावें। यदि उपलब्ध नहीं है तो मानसिक पूजा करलें।
 फिर उपरोक्त मंत्र का 101 बार उच्चारण करें। 
यह प्रयोग नवरात्रि में प्रारम्भ कर सकते हैं। 
यदि आप नवरात्रि में प्रारम्भ नहीं कर पारहे तो, किसी भी शुक्रवार को प्रात: सूर्योदय के समय इस प्रयोग को प्रारम्भ कर सकते हैं। 
इस मंत्र का एक सौ एक (101)  बार उच्चारण नित्य चालीस (40 days) दिन तक करना है।
चालीसवें दिन पत्ते को उसी पीले आसन में लपेट लें और मौली/ कलावा / रसासूत्र से बांध कर अपने गल्ला, तिजोरी या लाकर में रखदें।

श्रद्धा भाव से प्रयोग करें और लाभ पायें।
                                          ॥जय नवदुर्गा मां॥

Tuesday, 13 August 2024

पलट कर आती इस…

अच्छाई पलट-पलट कर आती रहती है...
ब्रिटेन के स्कॉटलैंड में फ्लेमिंग नाम का एक गरीब किसान था। एक दिन वह अपने खेत पर काम कर रहा था। अचानक पास में से किसी के चीखने की आवाज सुनाई पड़ी । किसान ने अपना साजो सामान व औजार फेंका और तेजी से आवाज की तरफ लपका।
आवाज की दिशा में जाने पर उसने देखा कि एक बच्चा दलदल में डूब रहा था । वह बालक कमर तक कीचड़ में फंसा हुआ बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा था। वह डर के मारे बुरी तरह कांप पर रहा था और चिल्ला रहा था।
किसान ने आनन-फानन में लंबी टहनी ढूंढी। अपनी जान पर खेलकर उस टहनी के सहारे बच्चे को बाहर निकाला।अगले दिन उस किसान की छोटी सी झोपड़ी के सामने एक शानदार गाड़ी आकर खड़ी हुई।उसमें से कीमती वस्त्र पहने हुए एक सज्जन उतरे
उन्होंने किसान को अपना परिचय देते हुए कहा- " मैं उस बालक का पिता हूं और मेरा नाम राँडॉल्फ चर्चिल है।"
फिर उस अमीर राँडाल्फ चर्चिल ने कहा कि वह इस एहसान का बदला चुकाने आए हैं ।
फ्लेमिंग नामक उस किसान ने उन सज्जन के ऑफर को ठुकरा दिया ।
 उसने कहा, "मैंने जो कुछ किया उसके बदले में कोई पैसा नहीं लूंगा।
किसी को बचाना मेरा कर्तव्य है, मानवता है , इंसानियत है और उस मानवता इंसानियत का कोई मोल नहीं होता ।"
इसी बीच फ्लेमिंग का बेटा झोपड़ी के दरवाजे पर आया।
उस अमीर सज्जन की नजर अचानक उस पर गई तो उसे एक विचार सूझा ।
उसने पूछा - "क्या यह आपका बेटा है ?"
किसान ने गर्व से कहा- "हां यह मेरा बेटा है !"
उस व्यक्ति ने अब नए सिरे से बात शुरू करते हुए किसान से कहा- "ठीक है अगर आपको मेरी कीमत मंजूर नहीं है तो ऐसा करते हैं कि आपके बेटे की शिक्षा का भार मैं अपने ऊपर लेता हूं । मैं उसे उसी स्तर की शिक्षा दिलवाने की व्यवस्था करूंगा जो अपने बेटे को दिलवा रहा हूं।फिर आपका बेटा आगे चलकर एक ऐसा इंसान बनेगा , जिस पर हम दोनों गर्व महसूस करेंगे।"
किसान ने सोचा "मैं तो अपने पुत्र को उच्च शिक्षा दिला पाऊंगा नहीं और ना ही सारी सुविधाएं जुटा पाऊंगा, जिससे कि यह बड़ा आदमी बन सके ।अतः इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता हूँ।"
बच्चे के भविष्य की खातिर फ्लेमिंग तैयार हो गया ।अब फ्लेमिंग के बेटे को सर्वश्रेष्ठ स्कूल में पढ़ने का मौका मिला।
आगे बढ़ते हुए उसने लंदन के प्रतिष्ठित सेंट मेरीज मेडिकल स्कूल से स्नातक डिग्री हासिल की।
फिर किसान का यही बेटा पूरी दुनिया में "पेनिसिलिन" का आविष्कारक महान वैज्ञानिक सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग के नाम से विख्यात हुआ।
लेकिन
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती! कुछ वर्षों बाद, उस अमीर के बेटे को निमोनिया हो गया ।
और उसकी जान सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग द्वारा बनाए गए पेनिसिलीन के इंजेक्शन से ही बची।
उस अमीर चर्चिल के बेटे का नाम था- विंस्टन चर्चिल , जो दो बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे !
हैं न आश्चर्यजनक संजोग।
इसलिए ही कहते हैं कि व्यक्ति को हमेशा अच्छे काम करते रहना चाहिए। क्योंकि आपका किया हुआ काम आखिरकार लौटकर आपके ही पास आता है ! यानी अच्छाई पलट - पलट कर आती रहती है!यकीन मानिए मानवता की दिशा में उठाया गया प्रत्येक कदम आपकी स्वयं की चिंताओं को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा ।
कुँए में उतरने के बाद
बाल्टी झुकती है,
लेकिन झुकने के बाद,
भर कर ही बाहर निकलती है।
यहीं जिन्दगी जीने का सार हैं।
जीवन भी कुछ ऐसा ही है,
जो झुकता है वो अवश्य,
कुछ न कुछ लेकर ही उठता है।
- साभार 🙏🏻

Friday, 9 August 2024

श्रीनागराजाष्टोत्तरशतनामावलिः

#श्रीनागराजाष्टोत्तरशतनामावलिः!!*
   नमस्करोमि देवेश नागेन्द्र हरभूषण ।
अभीष्टदायिने तुभ्यं अहिराज नमो नमः॥
ॐ अनन्ताय नमः ।
ॐ वासुदेवाख्याय नमः ।
ॐ तक्षकाय नमः ।
ॐ विश्वतोमुखाय नमः ।
ॐ कार्कोटकाय नमः ।
ॐ महापद्माय नमः ।
ॐ पद्माय नमः ।
ॐ शङ्खाय नमः ।
ॐ शिवप्रियाय नमः ।
ॐ धृतराष्ट्राय नमः ।10

ॐ शङ्खपालाय नमः ।
ॐ गुलिकाय नमः ।
ॐ इष्टदायिने नमः ।
ॐ नागराजाय नमः ।
ॐ पुराणपुरूषाय नमः ।
ॐ अनघाय नमः ।
ॐ विश्वरूपाय नमः ।
ॐ महीधारिणे नमः ।
ॐ कामदायिने नमः ।
ॐ सुरार्चिताय नमः ।20

ॐ कुन्दप्रभाय नमः ।
ॐ बहुशिरसे नमः ।
ॐ दक्षाय नमः ।
ॐ दामोदराय नमः ।
ॐ अक्षराय नमः ।
ॐ गणाधिपाय नमः ।
ॐ महासेनाय नमः ।
ॐ पुण्यमूर्तये नमः ।
ॐ गणप्रियाय नमः ।
ॐ वरप्रदाय नमः ।30

ॐ वायुभक्षाय नमः ।
ॐ विश्वधारिणे नमः ।
ॐ विहङ्गमाय नमः ।
ॐ पुत्रप्रदाय नमः ।
ॐ पुण्यरूपाय नमः ।
ॐ पन्नगेशाय नमः ।
ॐ बिलेशयाय नमः ।
ॐ परमेष्ठिने नमः ।
ॐ पशुपतये नमः ।
ॐ पवनाशिने नमः ।40

ॐ बलप्रदाय नमः ।
ॐ दैत्यहन्त्रे नमः ।
ॐ दयारूपाय नमः ।
ॐ धनप्रदाय नमः ।
ॐ मतिदायिने नमः ।
ॐ महामायिने नमः ।
ॐ मधुवैरिणे नमः ।
ॐ महोरगाय नमः ।
ॐ भुजगेशाय नमः ।
ॐ भूमरूपाय नमः ।50

ॐ भीमकायाय नमः ।
ॐ भयापहृते नमः ।
ॐ शुक्लरूपाय नमः ।
ॐ शुद्धदेहाय नमः ।
ॐ शोकहारिणे नमः ।
ॐ शुभप्रदाय नमः ।
ॐ सन्तानदायिने नमः ।
ॐ सर्पेशाय नमः ।
ॐ सर्वदायिने नमः ।
ॐ सरीसृपाय नमः ।60

ॐ लक्ष्मीकराय नमः ।
ॐ लाभदायिने नमः ।
ॐ ललिताय नमः ।
ॐ लक्ष्मणाकृतये नमः ।
ॐ दयाराशये नमः ।
ॐ दाशरथये नमः ।
ॐ दमाश्रयाय नमः ।
ॐ रम्यरूपाय नमः ।
ॐ रामभक्ताय नमः ।
ॐ रणधीराय नमः ।70

ॐ रतिप्रदाय नमः ।
ॐ सौमित्रये नमः ।
ॐ सोमसङ्काशाय नमः ।
ॐ सर्पराजाय नमः ।
ॐ सताम्प्रियाय नमः ।
ॐ कर्बुराय नमः ।
ॐ काम्यफलदाय नमः ।
ॐ किरीटिने नमः ।
ॐ किन्नरार्चिताय नमः ।
ॐ पातालवासिने नमः ।80

ॐ परमाय नमः ।
ॐ फणामण्डलमण्डिताय नमः ।
ॐ बाहुलेयाय नमः ।
ॐ भक्तनिधये नमः ।
ॐ भूमिधारिणे नमः ।
ॐ भवप्रियाय नमः ।
ॐ नारायणाय नमः ।
ॐ नानारूपाय नमः ।
ॐ नतप्रियाय नमः ।
ॐ काकोदराय नमः ।90

ॐ काम्यरूपाय नमः ।
ॐ कल्याणाय नमः ।
ॐ कामितार्थदाय नमः ।
ॐ हतासुराय नमः ।
ॐ हल्यहीनाय नमः ।
ॐ हर्षदाय नमः ।
ॐ हरभूषणाय नमः ।
ॐ जगदादये नमः ।
ॐ जराहीनाय नमः ।
ॐ जातिशून्याय नमः ।100

ॐ जगन्मयाय नमः ।
ॐ वन्ध्यात्वदोषशमनाय नमः ।
ॐ वरपुत्रफलप्रदाय नमः ।
ॐ बलभद्ररूपाय नमः ।
ॐ श्रीकृष्णपूर्वजाय नमः ।
ॐ विष्णुतल्पाय नमः ।
ॐ बल्वलध्नाय नमः ।
ॐ भूधराय नमः ।108

इति श्री नागराजाष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ।
🙏🙏🙏🙏

सद्गुरु की चेतना

सद्गुरु की चेतना: जीवन को दिव्यता की ओर ले जाने वाला मार्ग 🪷मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार के ज्ञान प्राप्त होते हैं, परंतु वह ज्ञान जो आत्...